रफीक खान
राजनीति में उठापटक और परिवर्तन का चलन आम बात है लेकिन एक ही राजनीतिक पार्टी के नेताओं में यह मुकाबला कम होता है। मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय एक ही राजनीतिक पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। पूर्व में प्रदेश की बागडोर संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जिन स्कूलों को CM राइज स्कूल के नाम से पहचाना जाता था, डॉ मोहन यादव को इस नाम से अंग्रेजी की बू आ रही थी और उन्होंने मंगलवार को यह नाम बदलकर महर्षि सांदीपनि के नाम कर दिया। राजनीतिक हलके में यह परिवर्तन और उठा पटक चर्चा के रूप में काफी सरगर्म है। CM Mohan Yadav changed the name of Shivraj Singh Chauhan, now schools will be identified with Maharishi "Sandipani"
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी योजना सीएम राइज स्कूल का नाम मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बदलने की घोषणा की है। इन स्कूलों को अब महर्षि सांदीपनी के नाम से जाना जाएगा। मोहन यादव ने कहा कि सीएम राइज स्कूलों में सभी प्रकार की चीजों को जोड़कर अद्भुत कल्पना की गई थी लेकिन एक बात खटकती है, इसका नाम-सीएम राइज स्कूल। अंग्रेज तो चले गए लेकिन उनकी मानसिकता तकलीफ देती है। सीएम राइज स्कूलों का नाम बदलने की इच्छा है। मोहन यादव मंगलवार से नए शिक्षा सत्र में शुरू हुए प्रवेशोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया और उन्हें पुस्तकें भेंट की। उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और शिक्षा पोर्टल 3.0 का उद्घाटन भी किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2021 में सीएम राइज स्कूल बनाने की घोषणा की थी। इनकी परिकल्पना ऐसे परिसर की थी जहां कान्वेंट स्कूल जैसी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध हों। अप्रैल, 2022 में इस योजना के तहत स्कूलों में प्रवेश दिए गए। मध्य प्रदेश में इस समय 270 सीएम राइज स्कूल संचालित हैं। तब राइज का मतलब बताते हुए कहा गया था कि आर का मतलब रिस्पेक्ट यानी सम्मान, आई का मतलब इंटेग्रिटी यानी सत्यनिष्ठा, एस का मतलब स्ट्रेंथ यानी ताकत और ई का मतलब एक्सीलेंस यानी उत्कृष्टता होता है।