रफीक खान
मध्य प्रदेश की हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पर लख रुपए का जुर्माना लगाया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जुर्माना की यह राशि मुख्य अभियंता को अपने जेब से चुकाना पड़ेगी ना कि वह शासकीय धन से इसकी अदायगी करेगा। यह राशि हाईकोर्ट की विधिक सेवा समिति कोष में जमा करना है। याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया था कि अभियंता लगातार कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं, वह हाई कोर्ट को एक तरह से मूर्ख समझते हुए बनाने की कोशिश कर रहे हैं। HC imposed a fine of Rs 1 lakh on PWD's "Chief Engineer", the officer is constantly misleading the court
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि अवमानना याचिका बालाघाट निवासी कृष्णकुमार ठकरेले सहित 6 अन्य ने लगाई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा और शिवम शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखा। हाई कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2000 में याचिकाकर्ताओं का विभाग ने टरमेशन कर दिया था। बाद में ये लोग लेबर कोर्ट गए, जहां से उन्हें नियमित करने के आदेश देते हुए सेवा से बहाल करने कहा था। अक्टूबर 2016 की नीति के स्थान पर रामनरेश रावत एवं उमादेवी के न्याय दृष्टांत के अनुरूप नियमितिकरण का लाभ दिए जाने के निर्देश हाईकोर्ट ने विभाग को दिए थे। मामले में मुख्य अभियंता एससी वर्मा ने 19 सितंबर 2024 को आदेश जारी करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता नियमितिकरण की पात्रता नहीं रखते हैं। मुख्य अभियंता वर्मा ने वित्त विभाग के एक परिपत्र का हवाला देते हुए कहा था कि सभी दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को नियमित कर दिया है। हाईकोर्ट ने जब इस जवाब का अवलोकन किया तो पाया कि मुख्य अभियंता एससी वर्मा ने कोर्ट को गुमराह करते हुए धोखा दे रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर इन चीफ राजेंद्र मेहरा को व्यक्तिगत रूप से इस न्यायालय के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए हैं। प्रकरण की संपूर्ण फाइल भी लेकर 25 मार्च को उपस्थिति सुनिश्चित करानी होगी।